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Monday, February 18, 2019

होली क्यों मनाई जाती है | Story of Holi Festival in Hindi

Story of Holi Festival in Hindi - भारत एक त्योहारों का देश है. यहां पूरी साल त्योहारों की धूम मची रहती है. इन सभी त्योहारों में से हिंदुओं का सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है "होली". 'Holi Festival' को भारत में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता हैं. लेकिन हर त्यौहार के जन्म के पीछे एक पौराणिक कहानी छिपी होती है. इसी प्रकार होली के पीछे भी एक रोमांचक और दिलचस्प कहानी है.

इसीलिए आज हम इस आर्टिकल में आपको बताएंगे कि "होली क्यों मनाई जाती है? और होली फेस्टिवल का इतिहास क्या है?" तो चलिए जानते हैं भारत के सबसे प्रसिद्ध त्यौहार होली की पौराणिक कथा जो कि होलिका के जीवन पर आधारित है.

होली क्यों मनाई जाती है (Story of Holi Festival in Hindi) 

Story of Holi Festival in Hindi
Holi Festival Story

भारत में होली को प्रेम का त्यौहार भी माना जाता है. यह त्योहार लोगों के जीवन में खुशियों के रंग भर देता है. लेकिन इस त्यौहार के पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है. होली मनाने के पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है. कथा के अनुसार प्राचीन काल में हिरणाकश्यप नाम का एक राक्षस हुआ करता था. जो उस समय के सबसे बलवान राक्षसों में से एक माना जाता था.

हिरणाकश्यप को देवताओं से बहुत नफरत थी. वह देवताओं के देव विष्णु भगवान को अपना सबसे बड़ा दुश्मन समझता था. लेकिन हिरणाकश्यप का पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था, इसीलिए हिरणाकश्यप अपने पुत्र की वजह से काफी अशांत रहता था. हिरणाकश्यप ने पहलाद को डराकर धमका कर समझाने का कई बार प्रयास किया, लेकिन हर बार असफल रहा.

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प्रहलाद किसी की परवाह न करते हुए, भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहते थे. इसी कारण हिरणाकश्यप ने प्रहलाद को मृत्युदंड देने का काफी प्रयास किया, पुराणों के अनुसार प्रहलाद को मृत्युदंड के दौरान- जहर देकर मारने की कोशिश की, हाथी के पैर से कुचला गया और पहाड़ों से फेंका गया, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा होने के कारण, हिरणाकश्यप प्रहलाद को मारने में हर बार असफल रहा.

प्रहलाद को मृत्यु दंड देने में कई बार असफल होने के बाद हिरण्यकश्यप की बहन होलिका ने प्रहलाद को आग से जला कर मृत्यु दंड देने की योजना बनाई. दरअसल हिरणाकश्यप की बहन होलिका को वरदान प्राप्त था, कि वह अग्नि में नहीं जलेगी. इसीलिए होलिका ने षड्यंत्र रचा कि वह प्रहलाद को लेकर अग्नि में बैठेगी. ताकि प्रहलाद अग्नि में जल कर मृत्यु को प्राप्त हो जाए.

लेकिन जब होलिका प्रहलाद को लेकर आग में गई. तो होलिका अग्नि में जल कर राख हो गई और पहलाद ज्यों के त्यों अग्नि से बाहर आए. प्रहलाद के जिंदा बचने की खुशी में लोगों ने इस दिन को त्योहार के रूप में मनाना शुरू कर दिया और यही से होली नामक त्यौहार का जन्म हुआ, इस त्यौहार को लोग बुराई पर सच्चाई की जीत के रूप में भी मनाते हैं. इस दिन लोग एक दूसरे को रंग लगाकर अपनी खुशी का इजहार करते हैं.

आशा करता हूं, कि आपको समझ आ गया होगा कि होली क्यों मनाते हैं. अगर आपको "होली की कहानी (Story of Holi Festival in Hindi)" पसंद आया हो तो अपने दोस्तों के साथ सोशल मीडिया पर इसे शेयर जरूर करें. आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएं.

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